Saturday, 2 April 2011

मनमोहन सिंह को नींद क्यों नहीं आई ?

पिछले दिनों हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक बयान आया। बयान क्या आया उन्होंने खुली घोषणा कर दी की देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। और इस बयान की पूरी सेकुलर जमात ने वाह वाही की। इस समय ये देश के दलितों, वनवासियो और पिछडो को भूल गए। वेसे भी जब मुसलमानों की बात आती है तो ये अपने बाप को भी भूल जाते है तो फिर दलितों और वनवासियो की औकात ही क्या है इनकी नजरो में।

मनमोहन सिंह को कहना था तो यही कह देते की देश के संसाधनों पर पहला हक़ देश के गरीबो का है, जिसमे सभी तबके के गरीब लोग शामिल है। पर सिंह साहब ने ऐसा नहीं कहा। कहते भी क्यों, अगर इस तरह का बयान नहीं देते तो इन्हें "सेकुलर" कौन कहता।

सिंह साहब जरा एक बात हमारी भी सुनलो, इस देश के मुसलमानों का पहला हक अगर किसी पर है तो वो पाकिस्तान और बंगलादेश पर है। जो ये 1947 में बटवारे के समय ले चुके है। एक अलग देश की मांग मुसलमानों ने ही तो की थी। पाकिस्तान कोई सिंध, पंजाब और पेशावर के मुसलमानों ने नहीं चाहा था, पाकिस्तान तो चाहा था उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और बंगाल के मुसलमानों ने। इतिहास गवाह है मुस्लिम लीग के उम्मीदवार कभी सिंध या पंजाब से नहीं जीतते थे, वे जीतते थे उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और बंगाल से। इन्ही लोगो का पाकिस्तान पर पहला हक़ बनता है। लेकिन पाकिस्तान बनने के बाद भी ये लोग पाकिस्तान नहीं गए। क्यों नहीं गए ? क्योकि इनका नारा है "हस के लिया पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिन्दुस्तान"।

मनमोहन सिंह को अगर पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से इतना ही प्यार है तो ये क्यों पाकिस्तान से भाग कर आए थे बटवारे के समय। क्यों पाकिस्तान में ही नहीं रह गए, "शांति" और "अहिंसा" प्रिय मुसलमानों के साथ। यही सवाल ज्योति बसु और कुलदीप नैयर से पूछना चाहिए, क्यों आये थे ये पूर्वी बंगाल और सियालकोट से भाग कर। इस बारे में ये कभी नहीं बोलेंगे। क्योंकि इसके बारे में चर्चा होते ही इनके सेकुलरिस्म की पोल जो खुल जाएगी।

देश के बटवारे के समय साफ साफ फैसला हुआ था, की पाकिस्तान मुसलमानों के लिए है और हिन्दुस्थान हिन्दुओ, सिखों, बौद्धों और जैनियों के लिए है। और जो हिन्दू या सिख पाकिस्तान में रहना चाहता है वो वहां रह सकता है लेकिन उसे पाकिस्तान (मुसलमानों) के हिसाब से रहना होगा और जो मुसलमान भारत में रहना चाहता है, रह सकता है लेकिन उसे यहाँ के कानून के हिसाब से रहना होगा। जो सभी के लिए बराबर होगा। फिर आज ये मुस्लिम पर्सनल लो बोर्ड क्यों, ये वक्फ बोर्ड क्यों?

मनमोहन सिंह और उसके पिछलग्गू ये कान खोल कर सुनले की इस देश पर सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओ, सिखों, बौद्धों और जैनियों का हक़ है। मुस्लमान का पहला हक़ अगर किसी पर है तो वो पाकिस्तान और बंगलादेश पर है। जो वो १९४७ में ले चुके है। और जो मुस्लमान भारत में अपने आपको उपेक्षित और असुरक्षित समझता है वो पाकिस्तान या बंगलादेश जा सकता है। हम भारतीयों का भी ये फर्ज है की उसे बोर्डर तक छोड़ कर आये।

ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय मुस्लिम को ग्लासगो बम्ब कांड में वहा की पुलिस गिरफ्तार करती है तो, मनमोहन सिंह कहते है की उन्हें रात भर नींद ये सोचते हुए नहीं आई की उसके परिवार पर क्या बीत रही होगी। अरे सिंह साहब आपकी नींद जब क्यों नहीं टूटी जब नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में 76 crpf के जवानो की हत्या की थी। तब आपने ये क्यों नहीं सोचा की इन शहीद जवानों के परिवार पर क्या बीत रही होगी। क्यों क्योकि ये सब हिन्दू थे। इसलिए उनकी आपको कोई चिंता नहीं थी। आपकी नींद जब क्यों नहीं टूटी जब ऑस्ट्रेलिया में ही भारतीय छात्रो की हत्या हो रही थी और उने लुटा ख्सुटा जा रहा था। और तो और आपकी नींद 1984 के दंगा पीड़ित सिखों की पुकारो से भी नहीं टूटी क्या? मगर एक आतंकवादी की गिरफ़्तारी से आपको नींद नहीं आती।

दरअसल यही इस देश का दुर्भाग्य है। हिन्दू, सिख, बौध, जैन जो इस देश को प्यार करते है। इस देश की सुरक्षा में अपनी जान तक कुर्बान कर देते है उनकी चिंता किसी को नहीं है। हमारे हुकमरानो को भी नहीं। मगर आतंकवादियो की गिरफ़्तारी से हमारे हुकमरानो की नींद जरुर टूटती है।

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